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PSLV की अब तक की सबसे लंबे दूरी की उड़ान - PSLV C35 का प्रक्षेपण

Date : 09 Nov 2016

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PSLV C35 के द्वारा SCATSAT-1 उपग्रह ध्रुवीय सौर-समावर्ती कक्षा में ७३० किमी के ऊंचाई पर छोड़ा जाएगा. पाँच अन्य विदेशी उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में ६८९ किमी पर छोड़े जाएँगे. 'मल्टिपल बर्न' तकनीक का प्रयोग उप


सारांश

PSLV C35 के द्वारा SCATSAT-1 उपग्रह ध्रुवीय सौर-समावर्ती कक्षा में ७३० किमी के ऊंचाई पर छोड़ा जाएगा. पाँच अन्य विदेशी उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में ६८९ किमी पर छोड़े जाएँगे. 'मल्टिपल बर्न' तकनीक का प्रयोग उपग्रह विमोचन के लिए बड़ा ही किफायती है, और इसीलिए इसरो ने इसका चुनौतीभरा उपयोग सही समझा है.



सविस्तर बातमी

एक और महत्वपूर्ण पड़ाव: 
इसरो \\'मल्टिपल बर्न\\' तकनीक का प्रयोग कर एक ही अग्निबाण से, थोडे-थोडे अंतरालमें, दो भिन्न कक्षाओं में, अनेक उपग्रह छोड़ेगा !

इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV C35 का प्रक्षेपण उसके इतिहास में सुवर्णाक्षरों में लिखा जाएगा. यह PSLV की अब तक सबसे लम्बी दूरी की उड़ान होगी.

PSLV C35 अपने साथ ३७१ किलोग्राम वजन का SCATSAT-1 नामक उपग्रह ले जाएगा. साथ और उपग्रह भी साथ होंगे.

तकनीकी तौर पर सब से कठिन बात यह होगी, कि इसरो इस उड़ान के साथ एक ही अग्निबाण से उपग्रहों को दो विभिन्न कक्षाओं में स्थापिंत करने का प्रयास करेगा.

इसरो \\"मल्टिपल बर्न\\" तकनीक का प्रयोग करेगा. इसमें अग्निबाण के चौथे चरण के इंजिन को बंद कर थोड़ी ही देर के बाद पुन: चालू कर दिया जाता है, जो अग्निबाण को उसकी अगली कक्षा तक पहुँचाता है.

यह कार्य बड़ा नाजुक होता है, क्यों कि अग्निबाण और उसपर सवार माल को क्षति पहुँचाए बगैर इंजिन को चालु करने के लिए इंजिन का तापमान एक विशिष्ट मर्यादा से कम रखना होता है.

इसरो इस तकनीक का सफल प्रदर्शन पहले ही दो बार कर चुका है - जून २०१६ में PSLV C34 और दिसंबर २०१५ में PSLV C29 के साथ. लेकिन लादे हुए भार (उपग्रह) के साथ इसरो इस का पहली बार प्रयास करेगा.

PSLV C35 के द्वारा SCATSAT-1 उपग्रह ध्रुवीय सौर-समावर्ती कक्षा में ७३० किमी के ऊंचाई पर छोड़ा जाएगा. पाँच अन्य विदेशी उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में ६८९ किमी पर छोड़े जाएँगे.

SCATSAT-1 का विमोचन उड़ान के १७ वे मिनट में होगा, और उस के बाद चौथे चरण के इंजिन को बंद किया जाएगा, और वैज्ञानिक इंजिन के मानकों का बारीकी से निरिक्षण करेंगे.

तय समय पर बीस सेकण्ड के लिए इंजिन फिर से चालू किया जाएगा, जो अग्निबाणको उसकी दूसरी कक्षा में पहुँचाने के लिए पर्याप्त होगा. दूसरी कक्षा में बाकी पाँच विदेशी उपग्रह छोड़े जाएँगे.

\\'मल्टिपल बर्न\\' तकनीक का प्रयोग उपग्रह विमोचन के लिए बड़ा ही किफायती है, और इसीलिए इसरो ने इसका चुनौतीभरा उपयोग सही समझा है.

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मिलिंद वेर्लेकर

टीम भारतीयन्स

बातमी सौजन्य